What is Sri Suktam (श्रीसूक्त) Sri Sukta | How to Read Shri Sukta | Great Shree Sukta with Meaning

श्रीसूक्त | Sri Suktam 

 

What is Sri Suktam or Sri Sukta | How to Read Shri Sukta | Shree Sukta with Meaning

What do people do to get money? Money is needed for everything from filling the stomach. Who is the person in the world who does not need money? Every person has a desire to become rich but wealth is attained by those who are hardworking and fortunate.

Today we will tell you some such remedies mentioned in religious texts, by which the lock of your luck will open soon and you will become rich soon.

According to our religious texts, Goddess Lakshmi is worshiped for the attainment of wealth as she is the goddess of wealth. Many mantras have been given in our texts to please Goddess Lakshmi. One of those mantras is Sri Suktam or Sri Sukta. Without knowing the meaning of any stotra or any mantra, the full fruit of its recitation is not obtained.

 

श्रीसूक्त क्या है | श्रीसूक्त का पाठ कैसे किया जाता है | श्रीसूक्त अर्थ सहित

 

धन प्राप्ति के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते। पेट भरने से लेकर सभी कार्यों के लिए धन की आवश्यकता होती है। संसार में ऐसा कौन सा व्यक्ति है जिसे धन की आवश्यकता नहीं है। हर व्यक्ति को धनवान बनने की लालसा होती है परंतु धन उसी को प्राप्त होता है जो मेहनती और किस्मत वाला है।

आज आपको हम धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कुछ ऐसा उपाय बताएंगे जिससे आपकी किस्मत का ताला शीघ्र ही खुल जाएगा और आप शीघ्र ही धनवान बन जाएंगे।

हमारी धार्मिक ग्रंथों के अनुसार धन की प्राप्ति के लिए देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) की पूजा की जाती है क्योंकि वह धन की देवी हैं। लक्ष्मी देवी को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्र हमारे ग्रंथों में दिए गए हैं। उन्हीं में से एक मंत्र है श्रीसूक्त (Sri Suktam or Sri Sukta)। किसी भी स्तोत्र का या किसी भी मंत्र का अर्थ जाने बिना उसका पाठ का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

 

Sri Suktam or Shri Sukta

 

How to Read Sri Suktam

On every Friday morning, after retiring from bathing, one should wear clean and pure clothes. After that, taking a silky red cloth, install a picture or idol of Mata Lakshmi on the lotus. Offer red flowers to Goddess Lakshmi like rose, hibiscus, sandalwood, abir, gulal etc. Worship Goddess Lakshmi. Enjoy rice kheer. After the enjoyment, recite Sri Suktam in front of the mother.

After this, do the aarti of Mata Lakshmi ji. If there is difficulty in reciting Sri Suktam or Sri Sukta in Sanskrit, then you can read it in Hindi language also. Worship Goddess Lakshmi on every Friday, but if due to some reason the worship cannot be done on Friday, then you can fulfill your wish by worshiping Amavasya and Purnima by this method.

The recitation of Sri Suktam in Navratri and on Diwali, when done properly, gives special blessings of Lakshmi ji. In Shri Suktam or Shri Sukta, Agnidev, Kardam Rishi, Chitlit are requested to invoke Goddess Lakshmi here.

The joys of Shree Suktam, Kardam, Chiklit, Jatveda Rishi; ‘Sri’ is the deity and Anushtup, Prastarpankti and Trishtup are the verses. To get opulence and prosperity, the chanting of the mantras of Shree Sukta and the worship of Havan with these mantras are particularly fruitful. This hymn is read in the Rik Appendix. Sri Suktam or Sri Sukta is as follows:-

 

श्रीसूक्त का पाठ कैसे करना चाहिए

प्रत्येक शुक्रवार की सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र धारण करना चाहिए। तत्पश्चात रेशमी लाल कपड़ा लेकर माता लक्ष्मी की कमल पर विराजित तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। देवी लक्ष्मी को लाल पुष्प चढ़ाएं जैसे गुलाब, गुड़हल, चंदन, अबीर, गुलाल आदि से देवी लक्ष्मी का पूजन करें। चावल की खीर का भोग लगाएं। भोग के बाद माता के सामने श्रीसूक्त (Sri Suktam) का पाठ करें।

इसके बाद माता लक्ष्मी जी की आरती करें। संस्कृत में यदि श्रीसूक्त (Sri Suktam or Sri Sukta) पाठ करने में कठिनाई हो तो हिंदी भाषा में भी आप इसको पढ़ सकते हैं। प्रत्येक शुक्रवार को तो देवी लक्ष्मी की पूजा करें ही लेकिन किसी कारणवश अगर शुक्रवार को पूजा ना हो सके तो आप अमावस्या तथा पूर्णिमा को इस विधि द्वारा पूजा करके अपनी इच्छा पूरी कर सकते हैं।

श्रीसूक्त (Sri Suktam) के पाठ को नवरात्रि में तथा दिवाली पर विधि पूर्वक करने पर लक्ष्मी जी की विशेष कृपा मिलती है। श्रीसूक्त (Sri Suktam or Shri Sukta) में अग्निदेव, कर्दम ऋषि, चितलित से माता लक्ष्मी का अपने यहां आवाहन करने की विनती है।

श्रीसूक्त (Shree Suktam) के आनन्द, कर्दम, चिक्लीत, जातवेद ऋषि; ‘श्री’ देवता और अनुष्टुप्, प्रस्तारपंक्ति एवं त्रिष्टुप् छन्द हैं। ऐश्वर्य एवं समृद्धि को पाने के लिए श्रीसूक्त के मन्त्रों का जप तथा इन मन्त्रों से हवन, पूजन विशेष फलदायी होता है। यह सूक्त ऋक् परिशिष्ट में पठित है। श्रीसूक्त (Sri Suktam or Sri Sukta) इस प्रकार है-:

 

Shri Sukta or Sri Suktam

 

श्रीसूक्त (Sri Suktam / Sri Sukta)

 

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्त्रजाम्।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ॥१॥

तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।

यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥२॥

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रमोदिनीम्।

श्रियं देवीमुप ह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम्॥३॥

कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्दा

ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।

 

om hiranyavarnaan harineen suvarnarajatastrajaam

chandraan hiranmayeen lakshmeen jaatavedo ma aa vah

taan ma aa vah jaatavedo lakshmeemanapagaamineem

Yasyaan hiranyan vindeyan gaamashvan purushaanaham

ashvapoorvaan rathamadhyaan hastinaadapramodineem

shriyan deveemup hvaye shreerma devee jushataam

kaan sosmitaan hiranyapraakaaraamaarda

jvalanteen trptaan tarpayanteem

 

Meaning

O omniscient fire god! (Agnidev) You are of gold (golden) complexion, a little green in color, wearing gold and silver necklaces, happy like the moon, invoke the golden goddess Lakshmidevi for me.

O fire god! Invoke for me the Goddess Lakshmi, who is never destroyed and by whose arrival I will get gold, cow, horse and daughter etc. 2॥

The goddess in front of whom there are horses and chariots behind them and who are pleased to hear Hastinaad, I invoke the same Shri Devi, may Lakshmi Devi be received by me. The one who is Brahmarupa, who smiles softly, covered with gold veils, merciful, brilliant, full-time, devotee, on the lotus seat.

 

अर्थ 

हे सर्वज्ञ अग्निदेव! (Agnidev) आप सोने (सुवर्ण) के समान रंगवाली, किंचित् हरितवर्ण विशिष्टा, सोने और चाँदी के हार पहनने वाली, चंद्र के सामान प्रसन्न कान्ति, स्वर्णमयी लक्ष्मीदेवी का मेरे लिये आवाहन करें ॥१॥

हे अग्निदेव! उन लक्ष्मीदेवी (Goddess Lakshmi) का, जिनका कभी विनाश नहीं होता तथा जिनके आगमनसे मैं सोना, गौ, घोड़े तथा पुत्रादि को प्राप्त करूँगा, मेरे लिये आवाहन करें ॥२॥

जिन देवी के आगे घोड़े तथा उनके पीछे रथ रहते हैं तथा जो हस्तिनाद को सुनकर प्रसन्न होती हैं, उन्हीं श्री देवी का मैं आवाहन करता हूँ लक्ष्मी देवी मुझे प्राप्त हों॥३॥ जो साक्षात् ब्रह्मरूपा, मन्द-मन्द मुसकराने वाली, सुवर्ण के आवरण से आवृत, दया, तेजोमयी, पूर्णकामा, भक्तानुग्रहकारिणी, कमल के आसन पर

 

पद्येस्थितां पद्मवर्णा तामिहोप ह्वये श्रियम्॥४॥

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्ती

श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्।

तां पद्मिनीमी शरणं प्र पद्ये

अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥५॥

आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो

वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः।

तस्य फलानि तपसा नुदन्तु

या अन्तरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः ॥६॥

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।

 

Padyēsthitāṁ padmavarṇā tāmihōpa hvayē śriyam

Candrāṁ prabhāsāṁ yaśasā jvalantī

śriyaṁ lōkē dēvajuṣṭāmudārām

Tāṁ padminīmī śaraṇaṁ pra padyē

alakṣmīrmē naśyatāṁ tvāṁ vr̥ṇē

Ādityavarṇē tapasō̕dhi jātō

vanaspatistava vr̥kṣō̕tha bilvaḥ

Tasya phalāni tapasā nudantu

yā antarā yāśca bāhyā alakṣmīḥ

Upaitu māṁ dēvasakhaḥ kīrtiśca maṇinā saha

 

Meaning

I am here to invoke Lakshmi Devi, who is seated and Padmavarna. I am as bright as the moon, beautiful dytishalini, dazzling with fame, worshiped by the gods in heaven, generous, take refuge in Padmahasta Lakshmidevi. May my poverty go away. I choose you as a refuge 5

O light like the sun! Due to your tenacity, the most auspicious Bilva tree was born among the trees. Its fruits, by your grace, remove our external and internal poverty॥6॥ O goddess! May the fame of the daughter of Devaskha Kuber (Kuber Dev) and his friends Manibhadra and Daksha Prajapati, that is, I get wealth and fame.

 

अर्थ 

विराजमान तथा पद्मवर्णा हैं, उन लक्ष्मीदेवी का मैं यहाँ आवाहन करता हूँ॥४॥ मैं चन्द्र के समान शुभ्र कान्तिवाली, सुन्दर द्युतिशालिनी, यश से दीप्तिमती, स्वर्गलोक में देवगणोंके द्वारा पूजिता, उदारशीला, पद्महस्ता लक्ष्मीदेवीकी शरण ग्रहण करता हूँ। मेरा दारिद्र्य दूर हो जाय। मैं आपको शरण्य के रूप में वरण करता हूँ॥ ५ ॥

हे सूर्य के समान प्रकाश स्वरूपे! आपके ही तप से वृक्षों में श्रेष्ठ मंगलमय बिल्ववृक्ष उत्पन्न हुआ। उसके फल आपके अनुग्रह से हमारे बाहरी और भीतरी दारिद्रय को दूर करें॥६॥ हे देवि! देवसखा कुबेर (Kuber Dev) और उनके मित्र मणिभद्र तथा दक्ष प्रजापतिकी कन्या कीर्ति मुझे प्राप्त हों अर्थात् मुझे धन और यश की प्राप्ति हो।

 

प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥ ७ ॥

क्षत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मी नाशयाम्यहम्।।

अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्गुद मे गृहात्॥ ८ ॥

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।

ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोप ह्वये श्रियम्॥ ९॥

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।

पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥१०॥

कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम।

श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥११॥

 

Prādurbhūtō̕smi rāṣhṭrē̕smin kīrtimr̥d’dhiṁ dadātu mē

Kṣatpipāsāmalāṁ jyēṣṭhāmalakṣmī nāśayāmyaham

Abhūtimasamr̥d’dhiṁ ch sarvāṁ nirguda mē gr̥hāt

Gandhadvārāṁ durādharṣāṁ nityapuṣṭāṁ karīṣiṇīm

Īśvarīṁ sarvabhūtānāṁ tāmihōpa hvayē śriyam

Manasaḥ kāmamākūtiṁ vācaḥ satyamaśīmahi

Paśūnāṁ rūpamannasya mayi śrīḥ śrayatāṁ yaśaḥ

Kardamēna prajā bhūtā mayi sambhava kardama

Śriyaṁ vāsaya mē kulē mātaraṁ padmamālinīm

 

Meaning

I was born in this nation-country, grant me fame and prosperity॥7॥ I wish to destroy Lakshmi’s eldest sister, Alakshmi (the presiding deity of the poor), who remains filthy and feeble with hunger and thirst. Goddess! Remove all kinds of poverty and evil from my house. 8

I invoke to my house Lakshmidevi, the one who is fragrant, who has an entrance, who is virtuous and eternal, and who resides in the midst of the cow. May the fulfillment of the desires and resolutions of the mind and the truth of speech be attained by me; Sridevi in ​​the form of cow etc. animals and various food items and in the form of fame should come here.

We are the children of Kardam, son of Lakshmi. Karma Rishi! You should be born here with us and establish Goddess Lakshmi, who holds the garland of Padmas, in our family.

 

अर्थ

मैं इस राष्ट्र में-देश में उत्पन्न हुआ हूँ, मुझे कीर्ति और ऋद्धि प्रदान करें॥७॥ लक्ष्मी की ज्येष्ठ बहन अलक्ष्मी (दरिद्रताकी अधिष्ठात्री देवी)-का, जो क्षुधा और पिपासा से मलिन–क्षीणकाय रहती हैं, मैं नाश चाहता हूँ। देवि! मेरे घर से सब प्रकारके दारिद्र्य और अमंगल को दूर करो ॥ ८॥

सुगन्धित जिनका प्रवेशद्वार है, जो दुराधर्षा तथा नित्यपुष्टा हैं और जो गोमय के बीच निवास करती हैं, सब भूतों की स्वामिनी उन लक्ष्मीदेवी का मैं अपने घर में आवाहन करता हूँ॥९॥ मन की कामनाओं और संकल्प की सिद्धि एवं वाणी की सत्यता मुझे प्राप्त हो; गौ आदि पशुओं एवं विभिन्न अन्नों-भोग्य पदार्थों के रूप में तथा यश के रूप में श्रीदेवी हमारे यहाँ आगमन करें॥१०॥

लक्ष्मी के पुत्र कर्दम की हम सन्तान हैं। कर्दमऋषि! आप हमारे यहाँ उत्पन्न हों तथा पद्मों की माला धारण करने वाली माता लक्ष्मी देवी को हमारे कुल में स्थापित करें॥११॥

 

Shree Sukta or Sri Suktam

 

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे।

नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥१२॥

आर्द्रा पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह॥१३॥

आर्द्रा यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्।

सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह॥१४॥

तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।

यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वा विन्देयं पुरुषानहम्॥१५॥

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्।

सूक्तं पञ्चदशधं च श्रीकामः सततं जपेत्॥१६॥

 

Āpaḥ sr̥jantu snigdhāni ciklīta vasa mē gr̥hē

Ni ca dēvīṁ mātaraṁ śriyaṁ vāsaya mē kulē

Ārdrā puṣkariṇīṁ puṣṭiṁ piṅgalāṁ padmamālinīm

Candrāṁ hiraṇmayīṁ lakṣmīṁ jātavēdō ma ā vaha

Ārdrā yaḥ kariṇīṁ yaṣṭiṁ suvarṇāṁ hēmamālinīm

Sūryāṁ hiraṇmayīṁ lakṣmīṁ jātavēdō ma ā vaha

Tāṁ ma ā vaha jātavēdō lakṣmīmanapagāminīm

Yasyāṁ hiraṇyaṁ prabhūtaṁ gāvō dāsyō̕śvā vindēyaṁ puruṣānaham

Yaḥ śuciḥ prayatō bhūtvā juhuyādājyamanvaham

Sūktaṁ pañcadaśadhaṁ ca śrīkāmaḥ satataṁ japēt

 

Meaning

Water creates aliphatic substances. Laxmi Putra Chiklit! You should also reside in my house and make Goddess Lakshmi reside in my family. 12 O fire god! Ardsvabhava, Kamalhasta, Pushtirupa, Pitvarna, wearing a garland of Padmon, having a bright radiance like the moon, invoke the golden goddess Lakshmidevi to me 13॥

O fire god! Invite Lakshmidevi for me, who, though gracious to the wicked, is of a gentle nature, who is auspicious, who provides support, is a sage Rupa, has a beautiful complexion, is golden rosary, Suryaswaroopa and Hiranyamayi. 14

O fire god! Invoke for me the one who never perishes, Lakshmi Devi, whose arrival gives us a lot of wealth, cows, maidens, horses and daughters. 15 One who desires Lakshmi, should be pure and restrained, offer ghee in the fire every day and continuously recite Sri Suktam or Sri Sukta containing these fifteen hymns.

 

अर्थ

जल स्निग्ध पदार्थों की सृष्टि करे। लक्ष्मी पुत्र चिक्लीत! आप भी मेरे घर में वास करें और माता लक्ष्मी देवी का मेरे कुल में निवास करायें ॥ १२ ॥ हे अग्निदेव! आर्द्रस्वभावा, कमलहस्ता, पुष्टिरूपा, पीतवर्णा, पद्मोंकी माला धारण करने वाली, चन्द्रमा के समान शुभ्र कान्ति से युक्त, स्वर्णमयी लक्ष्मीदेवी का मेरे यहाँ आवाहन करें ॥१३॥

हे अग्निदेव! जो दुष्टों का निग्रह करने वाली होने पर भी कोमल स्वभाव की हैं, जो मंगलदायिनी, अवलम्बन प्रदान करने वाली यष्टि रूपा, सुन्दर वर्ण वाली, सुवर्णमालाधारिणी, सूर्यस्वरूपा तथा हिरण्यमयी हैं, उन लक्ष्मीदेवी का मेरे लिये आवाहन करें॥ १४ ॥

हे अग्निदेव! कभी नष्ट न होने वाली उन लक्ष्मीदेवी का मेरे लिये आवाहन करें, जिनके आगमन से बहुत-सा धन, गौएँ, दासियाँ, अश्व और पुत्रादि हमें प्राप्त हों ।। १५ ॥ जिसे लक्ष्मी की कामना हो, वह प्रतिदिन पवित्र और संयमशील होकर अग्नि में घी की आहुतियाँ दे तथा इन पन्द्रह ऋचाओं वाले श्रीसूक्त (Sri Suktam or Sri Sukta) का निरन्तर पाठ करे ॥१६॥

 

पद्मानने पद्मविपद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि।

विश्वप्रिये विष्णुमनोऽनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि सं नि धत्स्व ॥१७॥

पद्मानने पद्मऊरू पद्माक्षि पद्मसम्भवे।

तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्॥१८॥

अश्वदायि गोदायि धनदायि महाधने।

धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे॥१९॥

पुत्रपौत्रधनं धान्यं हस्त्यश्वाश्वतरी रथम्।

प्रजानां भवसि माता आयुष्मन्तं करोतु मे॥२०॥

धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्यो धनं वसुः।

धनमिन्द्रो । बृहस्पतिवरुणो धनमश्विना ॥२१॥

 

Padmānanē padmavipadmapatrē padmapriyē padmadalāyatākṣi

Viśvapriyē viṣṇumanō̕nukūlē tvatpādapadmaṁ mayi saṁ ni dhatsva

Padmānanē padma’ūrū padmākṣi padmasambhavē

Tanmē bhajasi padmākṣi yēna saukhyaṁ labhāmyaham

Aśvadāyi gōdāyi dhanadāyi mahādhanē

Dhanaṁ mē juṣatāṁ dēvi sarvakāmānśca dēhi mē

Putrapautradhanaṁ dhān’yaṁ hastyaśvāśvatarī ratham

Prajānāṁ bhavasi mātā āyuṣmantaṁ karōtu mē

Dhanamagnirdhanaṁ vāyurdhanaṁ sūryō dhanaṁ vasuḥ

Dhanamindrō. Br̥haspativaruṇō dhanamaśvinā

 

Meaning

Lotus-like face! The one who keeps her lotus feet on the lotus-tree! The one who loves lotus! With huge eyes like a lotus-team! Dear to the whole world! One who behaves according to the mind of Lord Vishnu! You place your lotus feet in my heart॥17

With a lotus-like face! Urupradesh like lotus! With lotus-like eyes! To emerge from the lotus! Padmaakshi! Follow me in the same way, which gives me happiness 18॥ Ashvadayini, Godaini, Dhandayini, Mahadhan Swarupini O Goddess! May I [always] have money, you give me all the things I want. 19.

You are the mother of beings. May my son, grandson, wealth, grain, elephant, horse, mule and chariot be blessed with a long life. 20 Agni, Vayu, Surya, Vasugana, Indra, Brihaspati, Varuna and Ashwini Kumar are all forms of glory. 21

 

अर्थ

कमल-सदृश मुख वाली ! कमल-दलपर अपने चरण कमल रखने वाली! कमल में प्रीति रखने वाली ! कमल-दल के समान विशाल नेत्रों वाली ! समग्र संसार के लिये प्रिय! भगवान् विष्णु के मनके अनुकूल आचरण करने वाली ! आप अपने चरण कमल को मेरे हृदय में स्थापित करें॥१७॥

कमल के समान मुखमण्डल वाली ! कमल के समान ऊरुप्रदेशवाली ! कमल-सदृश नेत्रों वाली! कमल से आविर्भूत होने  वाली! पद्माक्षि! आप उसी प्रकार मेरा पालन करें, जिससे मुझे सुख प्राप्त हो ॥१८॥ अश्वदायिनी, गोदायिनी, धनदायिनी, महाधन स्वरूपिणी हे देवि! मेरे पास [सदा] धन रहे, आप मुझे सभी अभिलषित वस्तुएँ प्रदान करें। १९ ।।

आप प्राणियों की माता हैं। मेरे पुत्र, पौत्र, धन, धान्य, हाथी, घोड़े, खच्चर तथा रथ को दीर्घ आयु से सम्पन्न करें ॥ २०॥ अग्नि, वायु, सूर्य, वसुगण, इन्द्र, बृहस्पति, वरुण तथा अश्विनी कुमार ये सब वैभव स्वरूप हैं ॥ २१ ॥

 

32 Names of Maa Durga

 

वैनतेय सोमं पिब सोमं पिबतु वृत्रहा।

सोमं धनस्य सोमिनो मह्यं ददातु सोमिनः॥२२॥

न क्रोधो न च मात्सर्यं न लोभो नाशुभा मतिः।

भवन्ति कृतपुण्यानां भक्त्या श्रीसूक्तजापिनाम्॥२३॥

सरसिजनिलये सरोजहस्ते

धवलतरांशुकगन्धमाल्यशोभे

भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे

त्रिभुवनभूतिकरि प्र सीद मह्यम् ॥ २४॥

विष्णुपत्नीं क्षमा देवी माधवीं माधवप्रियाम्।

लक्ष्मी प्रियसखीं भूमिं नमाम्यच्युतवल्लभाम्॥२५॥

 

Vainatēya sōmaṁ piba sōmaṁ pibatu vr̥trahā

Sōmaṁ dhanasya sōminō mahyaṁ dadātu sōminaḥ

Na krōdhō na ca mātsaryaṁ na lōbhō nāśubhā matiḥ

Bhavanti kr̥tapuṇyānāṁ bhaktyā śrīsūktajāpinām

Sarasijanilayē sarōjahastē

dhavalatarānśukagandhamālyaśōbhē

bhagavati harivallabhē manōjñē

tribhuvanabhūtikari pra sīda mahyam

Viṣṇupatnīṁ kṣamā dēvī mādhavīṁ mādhavapriyām

Lakṣmī priyasakhīṁ bhūmiṁ namāmyacyutavallabhām

 

Meaning

O Garuda! You sleep. Indra Sompana, the destroyer of Vritrasura. They should give the Soma of Garuda and Indra, the wealthy man, to the one who desires to have Sompan. 22 The virtuous people, who chant Sri Sukta with devotion, do not get angry, neither get jealous, nor can they get greedy, and their intellect is not corrupted. 23॥

Kamalvasini, holding lotus in her hand, extremely white clothes; O Bhagwati, who is adorned with Gandhanulepa and flowers, the beloved of Lord Vishnu, lavish and bestower of opulence to the Triloki! be happy with me 24 I bow to Lord Vishnu’s Bharya, Kshamswarupini, Madhavi, Madhavpriya, Priyasakhi, Achyutavallabha, Bhudevi Bhagwati Lakshmi. 25

 

अर्थ

हे गरुड! आप सोमपान करें। वृत्रासुर के विनाशक इन्द्र सोमपान करें। वे गरुड तथा इन्द्र धनवान् सोमपान करने की इच्छा वाले के सोम को मुझ सोमपान की अभिलाषा वाले को प्रदान करें॥ २२॥ भक्तिपूर्वक श्रीसूक्त (Sri Suktam or Sri Sukta) का जप करने वाले, पुण्यशाली लोगों को न क्रोध होता है, न ईर्ष्या होती है, न लोभ ग्रसित कर सकता है और न उनकी बुद्धि दूषित ही होती है॥ २३॥

कमलवासिनी, हाथमें कमल धारण करने वाली, अत्यन्त धवल वस्त्र; गन्धानुलेप तथा पुष्पहारसे सुशोभित होनेवाली, भगवान् विष्णु (Lord Vishnu) की प्रिया, लावण्यमयी तथा त्रिलोकीको ऐश्वर्य प्रदान करनेवाली हे भगवति! मुझपर प्रसन्न होइये ॥ २४॥ भगवान् विष्णुकी भार्या, क्षमास्वरूपिणी, माधवी, माधवप्रिया, प्रियसखी, अच्युतवल्लभा, भूदेवी भगवती लक्ष्मीको मैं नमस्कार करता हूँ॥ २५ ॥

 

महालक्ष्यै च विद्महे विष्णुपल्यै च धीमहि।

तन्नो लक्ष्मीः प्र चोदयात्॥२६॥

आनन्दः कर्दमः श्रीदश्चिक्लीत इति विश्रुताः।

ऋषयः श्रियः पुत्राश्च श्रीदेवीदेवता मताः॥२७॥

ऋणरोगादिदारिद्र्यपापक्षुदपमृत्यवः ।

भयशोकमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा ॥२८॥

श्रीवर्चस्वमायुष्यमारोग्यमाविधाच्छोभमानं महीयते।

धनं धान्यं पशुं बहुपुत्रलाभं शतसंवत्सरं दीर्घमायुः ॥२९॥

[ऋक् परिशिष्ट]

 

Mahālakṣyai ca vidmahē viṣṇupalyai ca dhīmahi

Tannō lakṣmīḥ prachōdayāt

Ānandaḥ kardamaḥ śrīdaściklīta iti viśrutāḥ

R̥ṣayaḥ śriyaḥ putrāśca śrīdēvīdēvatā matāḥ

R̥ṇarōgādidāridryapāpakṣudapamr̥tyavaḥ

Bhayaśōkamanastāpā naśyantu mama sarvadā

Śrīvarcasvamāyuṣyamārōgyamāvidhācchōbhamānaṁ mahīyatē

Dhanaṁ dhān’yaṁ paśuṁ bahuputralābhaṁ śatasanvatsaraṁ dīrghamāyuḥ

[R̥k pariśiṣṭa]

 

Meaning

We know and meditate on the wife of Lord Vishnu Goddess Lakshmi. May Lakshmi ji [to walk on the path] give us inspiration. 26॥

In the previous kalpa, there were four famous sages named Anand, Kardam, Srid and Chiklit. In the second cycle by the same name, they all became the sons of Lakshmi; Later, from the same sons, Mahalakshmi was blessed with a very luminous body, from the same Mahalakshmi the gods were also pleased. 27॥ Debt, disease, poverty, sin, hunger, depravity, fear, grief and mental heat, etc. – may all these obstacles be destroyed forever. 28

Bhagwati Mahalakshmi [for human] Oj, Ayush, health, wealth, grain, animal, get many sons and a long life of hundred years, and man should be worshiped by them and get prestige.29

 

अर्थ

हम विष्णुपत्नी महालक्ष्मी (Wife of Lord Vishnu Goddess Lakshmi) को जानते हैं तथा उनका ध्यान करते हैं। वे लक्ष्मी जी [सन्मार्ग पर चलने हेतु] हमें प्रेरणा प्रदान करें।। २६॥

पूर्व कल्प में जो आनन्द, कर्दम, श्रीद और चिक्लीत नामक विख्यात चार ऋषि हुए थे। उसी नाम से दूसरे कल्प में भी वे ही सब लक्ष्मी के पुत्र हुए; बाद में उन्हीं पुत्रों से महालक्ष्मी अति प्रकाशमान् शरीरवाली हुईं, उन्हीं महालक्ष्मी से देवता भी अनुगृहीत हुए।॥ २७॥ ऋण, रोग, दरिद्रता, पाप, क्षुधा, अपमृत्यु, भय, शोक तथा मानसिक ताप आदि-ये सभी मेरी बाधाएँ सदा के लिये नष्ट हो जायँ ॥ २८ ॥

भगवती महालक्ष्मी [मानवके लिये] ओज, आयुष्य, आरोग्य, धन धान्य, पशु, अनेक पुत्रों की प्राप्ति तथा सौ वर्ष के दीर्घ जीवन का विधान करें और मानव इनसे मण्डित होकर प्रतिष्ठा प्राप्त करे॥२९॥

 

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