[Shrimad Bhagawad Gita] Benefits of Reciting Different Chapter of Powerful Gita

Benefits of Reciting Different Chapter of Bhagawad Gita | श्रीमदभगवदगीता के किस अध्याय को पढ़ने से क्या फल प्राप्त होता है

 

Greatness, Reading & Importance of Shrimad Bhagavad Gita - Knowledge Showledge
Benefits of Reciting Gita of Knowledge Showledge

 

Describing the greatness of Shrimad Bhagwad Gita, Shri Krishna says that the person who reads the Gita under the peepal, on the banks of the Ganges, through Tulsi, in the temple, or near Shaligram, how much fruit he gets. It will not be counted. The person who recites the Gita during Shradh, becomes an object of special blessings of the ancestors. A person who recites even just one verse of the Gita, all his sorrows are destroyed and he also gets freedom from sinful deeds.

The fruit of donating one hundred and one books is very high and the person who donates the Geeta along with the cow gets immense happiness. By reciting the Geeta, humans can achieve a goal in their futile life. Therefore, one should keep on reading the Geeta regularly. If any person adopts the knowledge of Gita in his life, then he can make his aimless life aimless. Therefore, we should keep on moving on the path of action with a goal on one side.

Lord Krishna says that we should act and not desire for the results. Concentrate your mind on the Lord and do devotion. Similarly, Lord Shri Krishna disillusioned Arjuna with the Vishwavirat Roop which he had shown to Arjuna before the Mahabharata.

In this hectic life, it is not possible for most of the human beings to read the entire Geeta. In such a situation, there is a desire of many people to know that we can get proper benefit by reading one or two chapters of Geeta. According to Lord Shri Krishna, by reading which chapter of Shrimad Bhagwad Gita, I will tell you about the results which are as follows:-

 

One who reads the first chapter of the Gita, all his sins are run away.


One who reads the second chapter of the Gita – love will arise in his heart.


One who reads the third chapter of the Gita, his mind will be engaged in good deeds.


One who reads the fourth chapter of the Gita, his mind will get peace.


One who reads the fifth chapter of the Gita, his mind will be engaged in meditation yoga.


One who reads the Sixth Chapter of the Gita, his self-restraint will remain.


One who reads the seventh chapter of the Gita will become a supreme knowledgeable person.


One who reads the eighth chapter of the Gita, his body will be healthy.


One who reads the ninth chapter of the Gita, his Raja Yoga will be formed.


One who reads the Tenth Chapter of the Gita, his strength and intellect will increase.


One who reads the Eleventh Chapter of the Gita will get victory.


One who reads the Twelfth Chapter of the Gita will get strong-power devotion.


One who reads the Thirteenth Chapter of the Gita will get higher education.


One who reads the Fourteenth Chapter of the Gita, he will get success in all works.


One who reads the Fifteenth Chapter of the Gita, his heart’s desire will be fulfilled.


One who reads the Sixteenth Chapter of the Gita, there will be an increase in public wealth.


One who reads the Seventeenth Chapter of the Gita, his wealth will increase by blessedness.


One who reads the Eighteenth Chapter of the Gita will get riddhi siddhi in his house.


One who reads the entire Gita will grow for all.



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श्री कृष्ण श्रीमदभगवद गीता का महात्म्य बताते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य गीता का पाठ पीपल के नीचे, गंगा के किनारे, तुलसी के द्वारे, मंदिर में, या शालिग्राम जी के समीप पढ़ता है उसे कितना फल प्राप्त होगा यह गिना नहीं जा सकता। जो मनुष्य श्राद्धों में गीता का पाठ करता है वह पितरों के विशेष आशीर्वाद का पात्र बनता है। जो मनुष्य गीता के सिर्फ एक श्लोक का भी पाठ करता है उसके समस्त दुखों का नाश होता है और पाप कर्मों से भी मुक्ति मिलती है।

एक सौ एक पुस्तक दान करने का फल बहुत अधिक होता है और जो गौ के संग गीता का भी दान करता है उस मनुष्य को असीम सुख की प्राप्ति होती है। गीता को पढ़ने से मनुष्यों को अपने निरर्थक जीवन में एक लक्ष्य प्राप्त हो सकता है। इसलिए गीता का नियमित रूप से पठन करते रहना चाहिए। गीता के ज्ञान को यदि कोई भी मनुष्य अपने जीवन में ढाल ले तो वह अपने लक्ष्यहीन जीवन को लक्ष्यमय बना सकता है। अतः हमें एक ओर लक्ष्य साधकर कर्म के पथ पर बढ़ते रहना चाहिए।

कृष्ण भगवान् (lord Krishna) कहते हैं की हमें कर्म करना चाहिए और फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए। अपना मन प्रभु में एकाग्र कर भक्ति करें। इसी प्रकार भगवान् श्री कृष्ण (Lord Shree Krishna) ने विश्वविराट रूप (Vishwavirat Roop) जो की महाभारत से पूर्व अर्जुन को दिखाया था से अर्जुन (Arjun) का मोह भंग किया था।  

इस भागदौड़ भरे जीवन में ज्यादातर मनुष्यों के लिए पूरी गीता पढ़ना संभव नहीं हो पाता। ऐसी अवस्था में हमें गीता के किसी एक या दो अध्याय का पठन करके समुचित लाभ प्राप्त हो सके ऐसा जानने की इच्छा काफी लोगों की रहती है। भगवान श्री कृष्ण के अनुसार श्रीमदभगवद गीता (Shrimad Bhagwad Gita) के किस अध्याय को पढ़ने से क्या फल प्राप्त होता है उसके बारें में बताता हूँ जो इस प्रकार है :-

 

जो गीता का पहला अध्याय (First Chapter) पढ़े उसके सब पाप भागे।


जो गीता का दूसरे अध्याय (Second Chapter) को पढ़े-उसके हृदय में प्यार जगेगा।


जो गीता का तीसरा अध्याय (Third Chapter) पढ़े उसका मन शुभ कर्म में लगेगा।


जो गीता का चौथा अध्याय (Fourth Chapter) पढ़े उसके मन को शान्ति मिलेगी।


जो गीता का पांचवां अध्याय (Fifth Chapter) पढ़े उसका मन ध्यान योग में लगेगा।


जो गीता का छठा अध्याय (Sixth Chapter) पढ़े उसका आत्म-संयम बना रहेगा।


जो गीता का सांतवा अध्याय (Seventh Chapter) पढ़े वह परमज्ञानी बनेगा।


जो गीता का आठवां अध्याय (Eight Chapter) पढ़े उसका शरीर स्वस्थ रहेगा।


जो गीता का नवम् अध्याय (Ninth Chapter) पढ़े उसका राजयोग बनेगा।


जो गीता का दशम् अध्याय (Tenth Chapter) पढ़े उसकी बल-बुद्धि बढ़ेगी।


जो गीता का ग्याहरवां अध्याय (Eveleth Chapter) पढ़े उसको विजयश्री मिलेगी।


जो गीता का बाहरवां अध्याय (Twelfth Chapter) पढ़े उसको दृढ़-शक्ति भक्ति मिलेगी।


जो गीता का तेहरवां अध्याय (Thirteenth Chapter) पढ़े उसको उच्च शिक्षा मिलेगी।


जो गीता का चौदवां अध्याय (Fourteenth Chapter) पढ़े उसको सब कामों में सफलता मिलेगी।


जो गीता का पन्द्रवां अध्याय (Fifteenth Chapter) पढ़े उसकी मन की इच्छा पूरी होगी।


जो गीता का सोलहवां अध्याय (Sixteenth Chapter) पढ़े उसको जन धन की वृद्धि होगी।


जो गीता का सत्रवां अध्याय (Seventeenth Chapter) पढ़े उसके धन धन्य की वृद्धि होगी।


जो गीता का अठारवां अध्याय (Eighteenth Chapter) पढ़े उसके घर में रिद्धि सिद्धि मिलेगी।


जो पूरी गीता पढ़ेगा उसे सब की वृद्धि होगी।

 

आशा है कि आप को यह जानकारी पसंद आयी होगी।

 

Polite statement

“Protect Holy Mother Cow, Serve Parents and Respect Women”

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